भगवान श्रीकृष्ण के वंशज यदुवंशी जादौन राजपूतों का इतिहास – Jadaun/Jadon Rajput History

भगवान श्रीकृष्ण के वंशज यदुवंशी जादौन राजपूतों का इतिहास – Jadaun/Jadon Rajput History

जैसा की आप सब जानते हैं कि महाभारत में लिखा है कि यदुवंश यानि श्रीकृष्ण के वंश का अंत हो गया था | लेकिन पुराणों में यह भी लिखा हुआ है कि द्वारिका के अंतिम शासक और श्रीकृष्ण के प्रपोत्र चंद्रवंश शिरोमणि यदुकुलभुषण महाराज वज्रनाभ थे । जिन्हे अर्जुन ने बचाया और अपने साथ हस्तिनापुर ले गये और बाद में इंद्रप्रस्थ की राजगद्दी पर महाराज वज्रनाभ का राजतिलक करवाया, और इन्हीं महाराज वज्रनाभ और भगवान श्रीकृष्ण के वंशज जादौन, भाटी, जाडेजा और चुडासमा आदि राजपूत है ।

जादौन क्षत्रिय राजवंश का इतिहास :–
यदुवंशी क्षत्रिय ( जादौन , जाडेजा , भाटी और चुडासमा ) जय चंद्रवंशीय अवतार भगवान श्री कृष्णा .. जय श्री ठाकुर जी महाराज…

इन वीर क्षत्रियों के इतिहास के वर्णन से पूर्व इनकी उत्पति के बारे में विचार करते हे |
आदिकालीन ऋषि अत्रि के वंशज सोम की संताने (सोमवंशी ) चंद्रवंशी कहलाये। इस वंश के छठे (6th) चंद्रवंशी राजा ययाति के पुत्र चंद्रवंशी राजा यदु के वंशज “यदुवंशी” कहलाये। यदुवंश की 39वी पीढ़ी में श्री कृष्णा हुए और वही श्री कृष्णा से 88वी पीढ़ी के राजा भाटी अंतिम यदुवंशी शासक हुए। अंतिम यदुवंशी शासक से अभिप्राय यह है कि राजा भाटी के बाद यदुवंश यादों , भाटी , जाडेजा और चुडासमा उपशाखाओ से जाना गया। यादों से जादों और फिर जादौन ,, इस प्रकार यदुवंश में भाटी , जादौन , जाडेजा और चुडासमा ( जाडेजा और चुडासमा गुजरात में सबसे ज्यादा है ) राजपूत वंश चले। वर्तमान में करौली ( राजस्थान ) यदुवंशी जादौन ( जादव ) राजपूतो की सबसे बड़ी रियासत है।जिसकी स्थापना 13वी शताब्दी में हुई थी। 1701 मे करौली राजघराने से आकर ठाकुर छतरभुज सिंह जी ने उत्तर प्रदेश के एटा जिले में अबागढ़ जागीर बसाई। राजा बलवंत सिंह 1892 – 1909 अबागढ़ जागीर के बहुप्रसिद्ध राजा हुए है , इन्होने कॉलेज निर्माण के लिए हजारो एकड़ जमीन दान में दी। जहा उनकी म्रत्यु (1909) के बाद उनके नाम से “राजा बलवंत सिंह कॉलेज ” आगरा में बनवाया गया था ‌।

 

जादौन राजपूतो के ठिकाने -अबागढ़ , मिश्रा , गभाना तहसील पूरी जादौन राजपूतो की है । खुर्जा से लेकर टूंडला, हाथरस तक जादौन ही है। जिला बुलंदशहर में भी जादौन राजपूतो के काफी गाँव है। सोमानी (अलीगढ ) अलीगढ जिले में लगभग 80 से 90 गाँव है। , कोटला ,रहिहाबाद , शमशाबाद (आगरा ), मुसफाबाद ,घिरौर (मैनपुरी ) , सिरसागंज (फिरोजाबाद ) और शिकोहाबाद क्षेत्र के आस – पास लगभग 84 गाँव में जादौन राजपूतो की बहुतायात है। फिरोजाबाद जिले में और भी यही गाँव है जहा जादौन राजपूतो के ठिकाने है। अडीग ( मथुरा ) , कौल ,हसनगढ़ , अकबराबाद, सिकदाराराम , खैर , किरावली , जेवर ( बुलन्दशहर ) इसके आलावा बुलन्दशहर में लगभग 150 गाँव ऐसे हैं जहा जादौन राजपूत बहुतायात में है। आदि और भी उत्तरप्रदेश में जादौन राजपूतो के ठिकाने है। इस प्रकार उत्तरप्रदेश में लगभग 440 गाँव जादौन राजपूतो के है। उत्तरप्रदेश में बसे ज्यादातर जादौन करोली से आये अपने पूर्वजो की संतान है। करोली जिले में जादौ पट्टी में 37 जादौन के ठिकाने है। भिंड और मुरैना मध्यप्रदेश में भी जादौन के लगभग 30 गाँव है। कुछ के नाम यहाँ उपलब्ध है – ( मुरैना ->> चचिहा ,धमकन,अटा, कीरतपुर, सुमावली, नरहेला, बुरावली,शहदपुर, बडोना, बांसी, गढ़ी ,हथरिया ,घुरघान, केमरा। भिंड –>> सोंधा,मानपुरा,चंदपुरा, विजयपुरा,जेतपुरा,रसनोल, पीपरपुरा, बिरखड़ी , अटर तहसील में उडोतगढ़ ) । मुरैना के पास सबलगढ़ में हीरापुर गाँव के आसपास बहुतायात में जादौन राजपूत बसे है वहां इनके लगभग 50 गाँव है। राजस्थान के धोलपुर और भरतपुर के डीग में 15-20 गाँव है। इन्दु और सोम संस्कृत में चन्द्र के पर्यायवाची है । इसलिए चन्द्र-वंश , सोम-वंश अथवा इन्दु-वंश किसी भी शब्द का प्रयोग किया जा सकता है । संभवतः वर्तमान हिन्दू शब्द का मूल भी इन्दु ही हो। यदुवंश की 8 शाखाये बताई जाती है ।
यदुवंश (जादव /जादौन ) – करोली का राजवंश
यदुवंशी भाटी – जैसलमेर का राजवंश
यदुवंशी जाडेजा – कुच्छ भुज का राजवंश
यदुवंशी समैचा – सिंध के मुसलमान

बाकी के बारे में कोई ठोस प्रमाण नही है । जाडेजा और चुडासमा दोनों के बारे में ऐसा मत है की ये समा में से अलग हुए है । जो की यदुवंश का हिस्सा था ‌। जाडेजा और चुडासमा की ओर भी दो उपशाखाये है। सरवैया और रायजादा । चूडासमा,सरवैया और रायजादा ये तीनो एक ही वंश की उपशाखा है।

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करौली के यदुवंशी जादौन राजपूत भगवान श्री कृष्णा की 64 वी पीढी के वंशज है। करौली जिले में जितने भी जादौन है उनकी 52 तड़े (शाखा) हैं।

करौली जिले में जादौन तड़ है -गौंजा, पाल, मुकुन्‍द, रेदास, आदि ।

** जाडेजा और चुडासमा की और भी दो उपशाखाये है। सरवैया और रायजादा ।चूडासमा,सरवैया और रायजादा ये तीनो एक ही वंशकी उपशाखा है।

** इस लेख में मौजूद जादौन राजपूतो के ठिकाने के अलावा भी पूरे भारत में जादौन राजपूतो के और भी कई ठिकाने है , लेकिन जानकारी के अभाव में उनके नाम यहाँ उपलब्ध नही है।

** महाराष्ट्र में पाए जाने वाले जाधव मराठा क्षत्रिय भी करौली ( राजस्थान ) से निकले जादौन राजपूतो की ही एक शाखा है।

** कुछ जगह करौली की स्थापना 15 वी शताब्दी में हुई बताई गयी है। लेकिन यह सही नहीं है, करौली की स्थापना 13 वीं शताब्दी में हुई थी ।

** चन्द्रवंशी राजपूत राजाओ यानि श्रीकृष्ण के वंशजों की अब तक 9 राजधानियाँ थी, जिनमेँ गजनी भी एक है । गजनी के लिए कहा जाता है- काशी मथुरा प्रयागबड़ गजनी अर भटनेर,
दिगम दिरावल लुद्रवो नौवोँ जैसलमेर।

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